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मंगलवार, मार्च 10, 2015

हाइकु ४

१  नील गगन
    सतरँगी चुनर
    हर्षाए मेघा ।

२   बादल राग
     फिर लेकर आई
     बरखा रानी ।

३   मोर मोरनी
     हरियाली का गीत
     शुभ आशीष ।

४   अरसे बाद
     बरसात का गीत
     फिर सुना है ।

                                                                       लेखक - नेहा मैथ्यूज़ 

मंगलवार, फ़रवरी 24, 2015

दोहे

1
 भारत माँ के सब बच्चे,यूँ लगते है संग 
साथ मिलकर ज्यों सजते,रंगोली के रंग।

2
अपनी छोड़ी राह पे,पथिक को था गुमान
पिछे मुड़कर देख रहा,ना चाहे सामान।


खुद को गर है जानना,साधो थोड़ा मौन 
अंतर की आवाज से,जानो तुम हो कौन।

4
अपने मन की सब कहे, दुजे का ना ध्यान ।
अपने माथे जब पड़ी, तब मिल पाया ज्ञान ।।

5
आंगन में धूप उतरे, नया सवेरा लाय।
कर्मरत जो रहे सदा, वो ही अवसर पाय।।

6
सबको जिसकी खोज है, कहते जिसको ज्ञान।
योग्यता से ही मिलता, पाना ना आसान ।।

7
निखर निखर है निखरता, बेहद इसका दाम।
हीरा यूं ही ना बना, करता है अभिमान।।

8
सागर जितना गहन है, सरल ना अनुमान।
मनुज की छिपी क्षमता, रत्नों की ज्यों खान।।

9
आंगन के बीच चमकें, रोशन हो घर द्वार।
दीप फैलाय रोशनी, इसका है उपकार।।

मंगलवार, सितंबर 18, 2012

हर कोई खुद में खास है

तेरी हथेली पर सबकुछ 
मेरी मुट्ठी में आस है
ईश्वर ने तुझको भी दी
मुझको भी दी श्वास है
हर कोई खुद में खास है।

मै भी सफल बनूँ  इक दिन
बस अवसर की तलाश है
तुझ सी बात है मुझ में भी
ऐसा मेरा विश्वास है
  हर कोई खुद में खास है।

सबके लिए है धरती
सबके लिए आकाश है
मंजिल ढूंढ़ ने वालों को
ढूंढ़ लेता प्रकाश है
हर कोई खुद में खास है।



                                                                                           

मंगलवार, जून 26, 2012

समय और मनुष्य

(1)
कल के भरोसे -
वक्त हाथ से 
फिसलता रहा ,
टलता रहा,
खलता रहा,
और यह सब यूँही 
चलता रहा।

(2)
सोचता हूँ घडी 
बदल डालूं ,
कुछ है 
जो रोकता है,
उसकी धुल हटा लूँ 
फिर देखू वक्त क्या है।

(3)
दिन मुश्किल है मगर 
शाम आज भी होगी,
मुश्किलों पे जीत पाकर 
हैरान वो आज भी होगी।

(4)
वह तब भी टिक टिक करती थी,
वह अब भी टिक टिक करती है,
अब उसकी यह टिक टिक 
जाने क्यूँ अच्छी लगती है,
शायद मेरे सोचने का 
नजरिया बदल गया,
समय तुम्हारी ताकत 
मैं भी संभल गया।



सोमवार, अगस्त 22, 2011

कान्हा कान्हा कहे मेरा मन


भक्त- 
कान्हा कान्हा कहे मेरा मन, कान्हा जाने कहाँ छुपा 
मुरली की आवाज़ सुना दे, इतनी तो कर दे कृपा |

कान्हा-
कान्हा कहे मैं तेरे ह्रदय में, रहता हूँ , रहूँगा सदा 
तू मुझको कहाँ पर ढूंढे , तेरे पास ही तो है पता|


भक्त-
कभी गुरु में , कभी पिता में मैंने तुझको देखा है
कभी भाई में , कभी सखा में भेस बदलकर बैठा है|

कान्हा-
कभी गुरु , कभी पिता , कभी भाई और कभी सखा
इन सब अवतारों में, मैं तो तेरे लिए ही बना - मिटा|

भक्त-
मिल गया अब मुझको कान्हा , नहीं, वह तो साथ ही था 
जब जब आशीर्वाद मिला था , सर पर उसका हाथ ही था|

कान्हा-
सच्चे भक्त का हाथ थामकर , मैं राह दिखलाता हूँ
धर्मं हो या कर्मभूमि हो , साथ हूँ , सारथी कहलाता हूँ|

शुक्रवार, मार्च 25, 2011

आप सभी के आशीर्वाद से...

बहुत दिनों से ब्लॉग पर कोई पोस्ट नहीं लिखी तो सोचा की क्यूँ न आज कुछ पुराने पन्ने पलट कर देखे जाये|यहाँ में लेकर आई हूँ उन सभी पोस्ट की झलकियाँ जिन्हें आपने सराहा|कुछ  रचनाओं  को ज्यादा कमेंट्स मिले तो कुछ को ज्यादा पेज व्यू |कुल मिलाकर यह सफर यादगार रहा|एक अच्छा ब्लॉगर कहलाना मेरा सपना है,अब तो उस दिन का इन्तजार है जब मुझे लोग एक अच्छी ब्लॉगर कहें|आप सभी के आशीर्वाद से| 

आती हर रोज सुबह
पर हमें है उस सुबह का इंतजार
जब सब देश एक होंगे
और बनेगा प्यारा संसार|
न होगी नफ़रत की दीवार 
बस होगी खुशियों की बौछार
हमें है उस सुबह का इंतजार
जब सब देश एक होंगे 
और बनेगा प्यारा संसार|

हर रचना को लिखे जाने का अपना एक महत्वपूर्ण कारण होता है , चाहे वह रचना कितनी ही साधारण से साधारण क्यूँ न हो |भगवान ने कुछ शब्दों को हम पर उतारा है तो जरूर इसके पीछे कुछ ना कुछ उद्देश्य छिपा है |

ईश्वर के बनाये नियमों को

तोड़ दिया इंसानों ने
दुनिया की मिलती राहों को
मोड़ दिया इंसानों ने |
राह एक थी मोड़ बन गए
देश कट गए,झंडे बंट गए
एक ईश्वर को कई धर्मों मैं
बाँट दिया इंसानों ने |
एक विश्व को बंटवारे का
कोढ़ दिया इंसानों ने |

हम है सिपाही हम है सिपाही 
देश की रक्षा करने निकले 
आजादी है हमने चाही| 
भारत माँ के रक्षक है  हम 
माँ के बेटे बहनों के भाई 
हम है सिपाही हम है सिपाही| 

आज नेट सर्फिंग के दौरान एक ब्लॉग द्वारा हाइकु से मेरा परिचय हुआ|कविता के इस जापानी रूप को देखकर, मुझे भी लगा की मैं हाइकु लिखूं|पर दिखने में चंद यह पंक्तिया लिखना बिल्कुल भी आसन काम नहीं है|फिर भी कोशिश करने मे क्या हर्ज है|


एक रौशनी दिखी जो, आशा जगा गयी,
जीवन की ज्योत जैसे, हमे थमा गयी|
समाज से कुछ लिया तो,कुछ लोटायें हम
एक सपना नया हमको दिखा गयी|


१. घर
पंछी लौटते 
घौंसले में है बच्चे 
घर आ गया |

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ
इन शब्दों मे है जादु|
'अ' से पुरे करो अरमान
'आ' से छुलो आसमान
'इ' से इज्जत करो सबकी
'ई'से सीखो ईमानदारी



माँ ने दिया है जन्म हमें
माँ ने ही है पाला 
माँ ने दिए संस्कार हमें
माँ ने जीवन में भरा उजाला|





गुरुवार, फ़रवरी 24, 2011

टोपी में से मोडा निकला

यह बात तब की है जब मेरा बेटा सोनू  २ साल का था और उसका मुंडन संस्कार हुए कुछ ही दिन हुए थे | मुझे उस पर बहुत लाड आता और कभी बहुत हंसी आती | एक दिन की बात है हमारे यंहां एक अंकल आये जो गंजे थे उन्होंने टोपी पहन रखी थी | उन्होंने अपनी टोपी उतारी और सर पर हाथ फेरा , इधर मैंने भी अपने बेटे सोनू की टोपी उतारी और उसके सर पर हाथ फेरा और आदत के अनुसार उसे लाड करते हुए कहा "टोपी में से मोडा निकला "मेरे इतना कहते ही कमरे में मौजूद सभी लोगों का हँसते-हँसते  बुरा हाल हो गया, मेरा और उन अंकल का चेहरा देखने लायक हो गया|  
- लवलीना मैथ्यूस 

रविवार, जनवरी 16, 2011

ईश्वर के दूत है अच्छे रचनाकार

हर रचना को लिखे जाने का अपना एक महत्वपूर्ण कारण होता है , चाहे वह रचना कितनी ही साधारण से साधारण क्यूँ न हो |भगवान ने कुछ शब्दों को हम पर उतारा है तो जरूर इसके पीछे कुछ ना कुछ उद्देश्य छिपा है |हो सकता है दूर कहीं किसी अन्जान को आपकी कोई रचना प्रभावित करती है और उसके जीवन में कोई महत्वपूर्ण बदलाव लाती है | ईश्वर ने आपको जरिया बनाकर जो शब्द लिखाये है हो सकता है उसमे आपके लिए या किसी ओर के लिए ईश्वर का सन्देश छिपा हो |इस तरह अच्छे रचनाकार ईश्वर का दूत बनते है | हमारे बड़े बुजुर्ग कहते है की ईश्वर अपनी बात किसी ना किसी तरह कह ही देते है,उसे समझना हमारा काम है| ईश्वर हमसे इस तरह बात करते है|मुझे इस बात का पूरा विश्वाश है | आप में से कई लोगो ने इस बात को महसूस किया होगा |क्या आप इस पर विश्वाश करते है |

शनिवार, नवंबर 20, 2010

ईश्वर भक्ति में शब्दरचना

जब कभी हम बहुत खुश होते है तब ईश्वर का धन्यवाद करते वक्त भक्ति में मन अनायास ही कुछ पंक्तियों की रचना कर देता है | ऐसा मेरे साथ भी कई बार हुआ है | ईश भक्ति की यह छोटी-छोटी शब्द रचनाये प्रस्तुत कर रही हूँ |

साईं भक्ति -

साईं की महिमा का मैं कैसे करूँ बखान 
सबसे अच्छी स्तुति यही,मैं ले लूँ तेरा नाम |
साईं राम ,साईं राम 


राम-कृष्ण भक्ति 

मान लो शबरी या तो सुदामा 
ओ मोरे कृष्णा,ओ मोरे रामा ||





मसीह भक्ति 

यीशु नाम का एक मसीहा 
परमेश्वर का बेटा वो 
हम सबको चंगाई देता 
दया का है सागर वो |







शुक्रवार, नवंबर 05, 2010

मैंने भी लिखे हाइकु १

आज नेट सर्फिंग के दौरान एक ब्लॉग द्वारा हाइकु से मेरा परिचय हुआ|कविता के इस जापानी रूप को देखकर, मुझे भी लगा की मैं हाइकु लिखूं|पर दिखने में चंद यह पंक्तिया लिखना बिल्कुल भी आसन काम नहीं है|फिर भी कोशिश करने मे क्या हर्ज है|५+७+५ अक्षरों के संयोजन से बनने वाले हाइकु पेश कर रही हूँ|

१.   पंछी चहके
     चहकता चमन
     चहके हम |

२.  सर उठाके
     चल रहे थे हम
     लो गिर पडे|

अभी के लिए इतना ही| कहा न यह  लिखना बिल्कुल भी आसन काम नहीं है| क्या में हाइकु सही तरह लिख पाई|जरुर बताये| 

शुक्रवार, अक्टूबर 29, 2010

बोलती तस्वीरें

माँ वह मेरी फोटो खींच रहे है !


चलो थोडा पानी से खेलें|


नहीं बेटा सर्दी लग जाएगी|


माँ एक कहानी सुनाओ न|


Photographs by - Veena Mathews



" इस ब्लॉग पर पोस्ट की गई सभी रचनाएँ मौलिक है जो की मेरी और मेरे परिवार के सदस्यों द्वारा लिखी गई है " | किताबों व अन्य प्रोडक्ट्स पर दी जानकारी अनुभव आधारित है |
धन्यवाद
नेहा मैथ्यूज़