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मंगलवार, अप्रैल 12, 2011

सम्पूर्ण सृष्टि करें नमन

सम्पूर्ण सृष्टि करें नमन 
कितना स्नेहिल तेरा मन 
तुने दिया है यह जीवन
तुझको करती हूँ अर्पण |

नन्ही सी किलकारी से 
तु कितनी खुश हो जाती थी
ऐ माँ तेरी हर लोरी 
मन में मिठास दे जाती थी |

नन्हे नन्हे क़दमों को 
जब तु चलना सिखलाती थी 
ऐ माँ तेरे क़दमों से 
मैं अपने कदम बढाती थी |

तेरे हाथों से खाया जो 
प्यार भरा हर एक कौर 
पेट भर भी जाये तो 
जी कहता है माँ और और  |

तेरी ममता की मुस्कान 
मेरे दिल को छु जाती है 
ऐ माँ तेरी हर एक सीख 
अमिट छाप दे जाती है |

घनी धुप में छाँव वृक्ष की 
सुख का आभास कराती है 
ऐ माँ तेरी ममता भी 
कुछ ऐसा अहसास कराती है |

सम्पूर्ण सृष्टि करें नमन 
कितना स्नेहिल तेरा मन 
तुने दिया है यह जीवन
तुझको करती हूँ अर्पण |



बुधवार, अक्टूबर 20, 2010

माँ

माँ ने दिया है जन्म हमें
माँ ने ही है पाला 
माँ ने दिए संस्कार हमें
माँ ने जीवन में भरा उजाला|
माँ का हम करे गुणगान
माँ ने  दी बच्चों को पहचान|
माँ के जैसा कौनसा रिश्ता जग मे
न तो धरती न तो नभ मे|
माँ का हृदय बहुत विशाल
रखती है बच्चों का ख्याल
माँ का हम करे गुणगान
माँ तो है सबसे महान|

" इस ब्लॉग पर पोस्ट की गई सभी रचनाएँ मौलिक है जो की मेरी और मेरे परिवार के सदस्यों द्वारा लिखी गई है " | किताबों व अन्य प्रोडक्ट्स पर दी जानकारी अनुभव आधारित है |
धन्यवाद
नेहा मैथ्यूज़