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बुधवार, अगस्त 12, 2026

भगवद् गीता यथारुप (Books I Read)

भगवद् गीता यथारुप मेरे जीवन में भगवान का भेजा सबसे अनुपम उपहार है। जब भी मन चिंताओं , भय और परेशानियों से घिरा होता है  तब भगवद् गीता ही सही मार्गदर्शन करती  है।  कहा जाता है कि दुनिया का  ऐसा कोई प्रश्न  नही जिसका  उत्तर भगवद् गीता में न हो। जो गीता पढ़ते है वे  इस बात से भली प्रकार सहमत  होंगे ।  यद्यपि भगवान ने यह ज्ञान अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में दिया था लेकिन ये ज्ञान हम सभी के लिए है क्योंकि कही न कही हम सब भी अपने भीतर  कोई न कोई युद्ध लड़ रहे  है अपने भय से अपनी चिंताओं आदि से।

मन स्वभाव से चंचल और हठी होता है और इधर उधर भागता फिरता है। जब अनगिनत चाहे अनचाहे  विचारों की श्रृंखला सारे जगत में  भ्रमण कर  लेने के बाद अनायास एक सुझाव भगवद् गीता पर आकर टिकती है तो ऐसा प्रतीत होता है की कोई भुला-भटका, थकाहारा व्यक्ति किसी की सहायता से अपने घर लौट आया हो। गीता पढने वालो पर यह एक विशेष कृपा ही है।  वह सुझाव भगवान् के द्वारा ही भेजा गया होता है क्योँकि भगवान ही चैत्यगुरु के रूप में ह्रदय के भीतर से हमारा मार्गदर्शन कर रहे होते है।  जीवन की परेशानियों से हटकर भगवद् गीता की शरण मेरे लिए वह घर है, जहा शांति मिलती है जहाँ सुकून है। जहाँ मेरे सर पर किसी का हाथ है जो मुझे गाइड कर रहा हो। 

वे है हमारे भगवान श्री कृष्ण 🙏 जो हमें अपने शरणागत होकर जीवन जीना सिखाते है। वह हमें समझाते है कि हम शरीर नही आत्मा है और भगवान के शाश्वत अंश है। वे हमें सही गलत का ज्ञान देते है। किसी भी प्रकार की  attachment न रखना और अपने स्वधर्म का त्याग न करते हुए भगवान की प्रसन्नता के लिए कर्म करना।  अपने मन और बुद्धि को भगवान में लगाना और जीवन के वास्तविक लक्ष्य को हमेशा याद रखना। यह सब भगवद् गीता की सीख है।

मैं कुछ वर्षो से भगवद् गीता यथारूप का अध्ययन कर रही हूँ और मुझ में काफी बदलाव आया है।  गीता के अठारह अध्यायों में हमें स्वयं के , ईश्वर के एवं जगत के बारे में गहराई से समझाया गया है। हमारे सभी सवाल प्रमुखतः इन्ही विषयों के अन्तर्गत होते है। जब भी मन उदास या दुखी हो या फिर कोई विशेष सलाह की आवश्यकता हो तो भगवद् गीता के  श्लोक याद आने लगते है। यह अनुभव अभिभूत करने वाला है। गीता पढकर मैं फिर से उसी उत्साह के साथ खड़ी हो जाती हूँ अपने जीवन को सकारात्मकता के साथ जीने में और भक्तिमार्ग पर अग्रसर होने में।

मंगलवार, फ़रवरी 10, 2026

Ask the monk

पुस्तक- Ask the Monk Answers to the Life's Most Intriguing Questions 
लेखक- नित्यानंद चरण दास 
प्रकाशक - Penguin Random House India 

इस पुस्तक में लेखक ने कर्म, भाग्य, धर्म और आध्यात्म जैसे विषयों पर चर्चा की है। यहा इस बारे में अक्सर पुछे जाने वाले  सवालों के जवाब बडे ही आसानी से समझा दिए गए हैं, जोकि शास्त्रों पर आधारित है। यह पुस्तक हमारे प्रश्नो और दुविधाओं का समाधान भली प्रकार से करने में समर्थ है। इस पुस्तक में 70 से अधिक अध्याय है जिनमें हमारे शंकाओं का समाधान किया गया है। उदाहरण के लिए आध्यात्मिक जन प्याज और लहसून का सेवन क्यों नही करते। वैदिक साहित्य में मांसाहार के बारे क्या कहा गया है। भगवान की लीलाओं के बारे में अक्सर पुछे जाने वाले सवालों के जवाब। मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है तथा धार्मिक रित रिवाजों के पीछे निहित कारण समझाए गए है। इसे पढ़कर मुझे अपने आध्यात्मिक जीवन में बडी सहायता मिली। यहा श्रीमद्भागवत के अनुसार प्रार्थना का सही क्रम सिखाया गया है। जोकि मुझे बहुत अच्छा लगा। और भी ढेर सारे प्रश्नों के उत्तर इस पुस्तक में जानने को मिलते है। नित्यानंद चरण दास जी की सरल और सहज वाक्यो में बात रखने की लेखन शैली पुस्तक को और भी पठनीय बनाती है। पुस्तक में दिए गए तथ्य भी ज्ञानवर्धक है जैसे कि - Types of 84 lac species, Size of the soul आदि। यह पुस्तक सभी को पढ़नी चाहिए खासकर उन्हे जिनके मन में धर्म और आध्यात्म को लेकर बहुत जिज्ञासा रहती है। 



" इस ब्लॉग पर पोस्ट की गई सभी रचनाएँ मौलिक है जो की मेरी और मेरे परिवार के सदस्यों द्वारा लिखी गई है " | किताबों व अन्य प्रोडक्ट्स पर दी जानकारी अनुभव आधारित है |
धन्यवाद
नेहा मैथ्यूज़