अपनी चुनी राह पर
पथिक करे गुमान
कभी कभी क्यूँ करने लगे
मन खुद पर अभिमान।
इस छोटी सी दुनिया में आपको मिलेंगी मेरी रचनाएं और कुछ अपनों के दिल से निकली बातें, यादें जिन्हें संजो कर रखना अच्छा लगता है.....
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स्व. डॉ.डी.एन.मैथ्यूस 24 मई 1955 -15 दिसंबर 2010 एक चिराग से रोशन था सारा जहां अब पूरी दुनिया वीरान है | श्रीमती लवलीना [पत्नी], कुल्वेंदर [पुत्र], मेघा,नेहा,वीना [पुत्रिया] और हमारा प्यारा ब्रुनो |