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शुक्रवार, अगस्त 24, 2012

अभिमान


अपनी चुनी राह पर 
पथिक करे गुमान 
कभी कभी क्यूँ करने लगे 
मन खुद पर अभिमान।



शनिवार, अगस्त 18, 2012

आज

किस्मत से झगडना छोड दिया मैंने 
और हवाई किलों को तोड दिया मैंने 
समय से उसके पंख उपहार माँग कर 
अपने परों में जोड लिया मैंने 
अब मैं कुछ जिंदादिल दिख रही हूँ 
सिर्फ अपने आज को लिख रही हूँ । 


शुक्रवार, जुलाई 20, 2012

पृथ्वी पर बढ़ रही तपन

पृथ्वी पर बढ़ रही तपन,
पिघल रहे हिमपर्वत हर क्षण
कटते जा रहे सारे वन
मुश्किल आ पड़ी भीषण
पृथ्वी पर बढ़ रही तपन,
पिघल रहे हिमपर्वत हर क्षण
क्रंदन कर रहा कण-कण
खतरे मैं है पर्यावरण
फिर क्यूँ नहीं पिघलता मानव मन?
क्यूँ नहीं पिघलता मानव मन?


मंगलवार, जून 26, 2012

समय और मनुष्य

(1)
कल के भरोसे -
वक्त हाथ से 
फिसलता रहा ,
टलता रहा,
खलता रहा,
और यह सब यूँही 
चलता रहा।

(2)
सोचता हूँ घडी 
बदल डालूं ,
कुछ है 
जो रोकता है,
उसकी धुल हटा लूँ 
फिर देखू वक्त क्या है।

(3)
दिन मुश्किल है मगर 
शाम आज भी होगी,
मुश्किलों पे जीत पाकर 
हैरान वो आज भी होगी।

(4)
वह तब भी टिक टिक करती थी,
वह अब भी टिक टिक करती है,
अब उसकी यह टिक टिक 
जाने क्यूँ अच्छी लगती है,
शायद मेरे सोचने का 
नजरिया बदल गया,
समय तुम्हारी ताकत 
मैं भी संभल गया।



सोमवार, अगस्त 22, 2011

कान्हा कान्हा कहे मेरा मन


भक्त- 
कान्हा कान्हा कहे मेरा मन, कान्हा जाने कहाँ छुपा 
मुरली की आवाज़ सुना दे, इतनी तो कर दे कृपा |

कान्हा-
कान्हा कहे मैं तेरे ह्रदय में, रहता हूँ , रहूँगा सदा 
तू मुझको कहाँ पर ढूंढे , तेरे पास ही तो है पता|


भक्त-
कभी गुरु में , कभी पिता में मैंने तुझको देखा है
कभी भाई में , कभी सखा में भेस बदलकर बैठा है|

कान्हा-
कभी गुरु , कभी पिता , कभी भाई और कभी सखा
इन सब अवतारों में, मैं तो तेरे लिए ही बना - मिटा|

भक्त-
मिल गया अब मुझको कान्हा , नहीं, वह तो साथ ही था 
जब जब आशीर्वाद मिला था , सर पर उसका हाथ ही था|

कान्हा-
सच्चे भक्त का हाथ थामकर , मैं राह दिखलाता हूँ
धर्मं हो या कर्मभूमि हो , साथ हूँ , सारथी कहलाता हूँ|

रविवार, जनवरी 16, 2011

ईश्वर के दूत है अच्छे रचनाकार

हर रचना को लिखे जाने का अपना एक महत्वपूर्ण कारण होता है , चाहे वह रचना कितनी ही साधारण से साधारण क्यूँ न हो |भगवान ने कुछ शब्दों को हम पर उतारा है तो जरूर इसके पीछे कुछ ना कुछ उद्देश्य छिपा है |हो सकता है दूर कहीं किसी अन्जान को आपकी कोई रचना प्रभावित करती है और उसके जीवन में कोई महत्वपूर्ण बदलाव लाती है | ईश्वर ने आपको जरिया बनाकर जो शब्द लिखाये है हो सकता है उसमे आपके लिए या किसी ओर के लिए ईश्वर का सन्देश छिपा हो |इस तरह अच्छे रचनाकार ईश्वर का दूत बनते है | हमारे बड़े बुजुर्ग कहते है की ईश्वर अपनी बात किसी ना किसी तरह कह ही देते है,उसे समझना हमारा काम है| ईश्वर हमसे इस तरह बात करते है|मुझे इस बात का पूरा विश्वाश है | आप में से कई लोगो ने इस बात को महसूस किया होगा |क्या आप इस पर विश्वाश करते है |

मंगलवार, दिसंबर 28, 2010

श्रद्धान्जली

 श्रद्धान्जली 

स्व. डॉ.डी.एन.मैथ्यूस 
24 मई 1955 -15 दिसंबर 2010
एक चिराग से रोशन था सारा जहां अब पूरी दुनिया वीरान है |
श्रीमती लवलीना [पत्नी], कुल्वेंदर [पुत्र], मेघा,नेहा,वीना [पुत्रिया] और हमारा प्यारा ब्रुनो 
   मेरे पूज्य पिता जो बहुत अच्छे भविष्यवक्ता व होम्योपेथिक डॉ. थे, 
उनका मिलनसार व्यक्तित्व हम सबके लिए प्रेरणास्त्रोत है|  
वो इस संसार में हमें अकेला छोड़ कर चले गए उनके आदर्शों  पर चलने के लिए हम कृतसंकल्प  है| 
भगवान उनकी आत्मा को शान्ति दे और 
हमें इस दुःख  को सहन करने की शक्ति दे|



रविवार, नवंबर 28, 2010

चिड़िया

दाना चुगती एक चिड़िया दूजी से बोली
सबको अच्छी लगती है हमारी बोली
सुबह-सुबह जब मिलकर चहचहाती है हम
लोग भूल जाते है अपने सारे गम
बच्चों के संग मिलकर माँ डाले दाना
सैर करते निहारे हमको नानी-नाना
इसी तरह सदा हम खुशियाँ फैलाए
आओ मिलकर फिर से हम चहचहाए |


शनिवार, नवंबर 20, 2010

ईश्वर भक्ति में शब्दरचना

जब कभी हम बहुत खुश होते है तब ईश्वर का धन्यवाद करते वक्त भक्ति में मन अनायास ही कुछ पंक्तियों की रचना कर देता है | ऐसा मेरे साथ भी कई बार हुआ है | ईश भक्ति की यह छोटी-छोटी शब्द रचनाये प्रस्तुत कर रही हूँ |

साईं भक्ति -

साईं की महिमा का मैं कैसे करूँ बखान 
सबसे अच्छी स्तुति यही,मैं ले लूँ तेरा नाम |
साईं राम ,साईं राम 


राम-कृष्ण भक्ति 

मान लो शबरी या तो सुदामा 
ओ मोरे कृष्णा,ओ मोरे रामा ||





मसीह भक्ति 

यीशु नाम का एक मसीहा 
परमेश्वर का बेटा वो 
हम सबको चंगाई देता 
दया का है सागर वो |







गुरुवार, नवंबर 18, 2010

हाइकु २

१. घर

पंछी लौटते 
घौंसले में है बच्चे 
घर आ गया |


२. सावन 

ऋतु सावन 
नभ में फैले रंग 
मनभावन | 

सोमवार, नवंबर 15, 2010

पुस्तक की महिमा


पुस्तक की महिमा न्यारी 
पुस्तक है जहां से प्यारी 
ये सबको अच्छी लगती
ये सबको शिक्षा देती 
हिंदी में संस्कारों का 
अच्छी-अच्छी कहानी का 
गणित में हिसाब का 
सामाजिक में समाज का 
देश के इतिहास का 
संस्कृति का सभ्यता का 
गीता का कुरान का 
पुजा का अजान का 
ज्ञान हमको देती है 
जितना इसको पढोगे 
उतना ज्ञान का अमृत देती है 
यह ज्ञान का भंडार है 
यह लेखों की भरमार है 
इसकी महिमा न्यारी है 
यह पुस्तक जहां से प्यारी है 
यह पुस्तक जहां से प्यारी है |

रविवार, नवंबर 14, 2010

मैं हिंदी का सम्मान क्यूँ न करूँ?

मैं सपने हिंदी में देखती हूँ ,प्रार्थना हिंदी में करती हूँ 
और मुझे आशीर्वाद भी हिंदी में दिए जाते है 
तो फिर मैं हिंदी का सम्मान क्यूँ न करू ?
 दूसरी भाषाओँ के मुकाबले मैं हिंदी में खुदको 
और समाज को अच्छी तरह अभिव्यक्त  कर पाती हूँ| 
हिंदी मेरी मातृभाषा है| हिंदी मुझे सम्मान दिलाती है
 तो फिर मैं हिंदी का सम्मान क्यूँ  न करूँ? 

जिज्ञासा

बादलों के बीच घर बनाकर 
इन्द्रधनुष रहता है 
क्या वह भी हाउस टैक्स भरता है 
दुनिया के पर्यटन नक़्शे पर 
क्या चाँद भी अंकित होता है ?
क्योंकि हर इंसान आजकल 
चाँद पर पिकनिक की बात कहता है 
आजकल जब इंसान 
दुसरे ग्रह की यात्रा करता है,
तो क्या वह भी पासपोर्ट,वीज़ा लेता है ?
क्या मशीनी रोबोट भी 
रोता है और खुश होता है ?
जवाब दो इसका 
क्या तुमने इस बारे में सोचा है ?
ये आजकल नन्हे-मुन्ने 
बच्चों की जिज्ञासा है |


शनिवार, नवंबर 13, 2010

सिपाही

हम है सिपाही हम है सिपाही 
देश की रक्षा करने निकले 
आजादी है हमने चाही| 
भारत माँ के रक्षक है  हम 
माँ के बेटे बहनों के भाई 
हम है सिपाही हम है सिपाही| 
देश की रक्षा की खातिर 
सीने पर भी गोली खाई| 
भारत माँ पर आंच न आये 
दुश्मन बच कर भाग न पाए 
ईश्वर इतनी शक्ति देना 
दुश्मन जंग न जीत पाए| 
आजादी के हम है राही
आजादी है हमने चाही 
हम है  सिपाही हम है सिपाही |

गाँधी जी

भारत की आजादी के लिए
गाँधी बापू ने संघर्ष किया
सत्य पर वह अडिग रहे
उन्होंने सत्याग्रह किया |
न्याय के लिए वो सदा लड़े
अहिंसा का मंत्र हमें दिया |
सत्य के वो पुजारी थे 
झूठ का साथ कभी न दिया |
आजादी के लिए लड़े 
गाँधी बापु कहलाये
भारत राष्ट्र के बेटे थे 
राष्ट्रपिता वह कहलाये | 

घडी

जादु की है छड़ी 
समय बतलाती घडी 
टिक टिक टिक टिक करती 
समय की सीढ़ी चढ़ती 
घडी की टिक टिक कहती 
समय बड़ा बलवान 
समय का कहना मानो 
पुरे होंगे हर अरमान 
जादु की है छड़ी 
समय बतलाती घडी |

बुधवार, नवंबर 10, 2010

एकता में शक्ति है

एकता में शक्ति है 
एकता में भक्ति है 
हिन्दुस्तानीयों के दिल में 
एकता धडकती है 
एकता अनेकता 
एकता में नेकता
एकता में है मज़ा 
ये दुश्मनों को दे सजा 
एकता में शक्ति है 
एकता में भक्ति है
हिन्दुस्तानीयों के दिल में 
एकता धडकती है|

चाँद,सितारे,कलम,किताब इनसे मैं करती हूँ बात

चाँद,सितारे,कलम,किताब 
इनसे मैं करती हूँ बात
कितने प्यारे दोस्त है मेरे 
देते है सब मेरा साथ| 
चाँद और सितारों को देखो 
फैलाते है ये प्रकाश
अपनी चमक मुझको देते है
जब भी मैं छूती आकाश
चाँद,सितारे,कलम,किताब
देते है सब मेरा साथ| 
कलम देती है मुझे हौसला
जगाती है यह मुझमे आस 
किताब देती विचारों का बल 
बनती है मेरी आवाज 
चाँद,सितारे,कलम,किताब 
इनसे मैं करती हूँ बात
कितने प्यारे दोस्त है मेरे 
देते है सब मेरा साथ|   

मंगलवार, नवंबर 09, 2010

मंजिल होगी तेर पास

मंजिल दूर नहीं तू मत डर 
जीत तेरी होगी हिम्मत कर
इतिहास इसका गवाह है 
हिम्मत वाला ही जीता है  
झूठ का दूर करदे दलदल 
सच से जीवन करदे उज्वल
जीवन से मत हो तू निराश 
मेहनत से मत हो तू हताश 
जीत होगी तेरे पास 
जीत होगी तेरे साथ
मंजिल होगी तेरे पास|

शुक्रवार, नवंबर 05, 2010

मैंने भी लिखे हाइकु १

आज नेट सर्फिंग के दौरान एक ब्लॉग द्वारा हाइकु से मेरा परिचय हुआ|कविता के इस जापानी रूप को देखकर, मुझे भी लगा की मैं हाइकु लिखूं|पर दिखने में चंद यह पंक्तिया लिखना बिल्कुल भी आसन काम नहीं है|फिर भी कोशिश करने मे क्या हर्ज है|५+७+५ अक्षरों के संयोजन से बनने वाले हाइकु पेश कर रही हूँ|

१.   पंछी चहके
     चहकता चमन
     चहके हम |

२.  सर उठाके
     चल रहे थे हम
     लो गिर पडे|

अभी के लिए इतना ही| कहा न यह  लिखना बिल्कुल भी आसन काम नहीं है| क्या में हाइकु सही तरह लिख पाई|जरुर बताये| 
" इस ब्लॉग पर पोस्ट की गई सभी रचनाएँ मौलिक है जो की मेरी और मेरे परिवार के सदस्यों द्वारा लिखी गई है " | किताबों व अन्य प्रोडक्ट्स पर दी जानकारी अनुभव आधारित है |
धन्यवाद
नेहा मैथ्यूज़