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रविवार, नवंबर 28, 2010

चिड़िया

दाना चुगती एक चिड़िया दूजी से बोली
सबको अच्छी लगती है हमारी बोली
सुबह-सुबह जब मिलकर चहचहाती है हम
लोग भूल जाते है अपने सारे गम
बच्चों के संग मिलकर माँ डाले दाना
सैर करते निहारे हमको नानी-नाना
इसी तरह सदा हम खुशियाँ फैलाए
आओ मिलकर फिर से हम चहचहाए |


सोमवार, नवंबर 15, 2010

पुस्तक की महिमा


पुस्तक की महिमा न्यारी 
पुस्तक है जहां से प्यारी 
ये सबको अच्छी लगती
ये सबको शिक्षा देती 
हिंदी में संस्कारों का 
अच्छी-अच्छी कहानी का 
गणित में हिसाब का 
सामाजिक में समाज का 
देश के इतिहास का 
संस्कृति का सभ्यता का 
गीता का कुरान का 
पुजा का अजान का 
ज्ञान हमको देती है 
जितना इसको पढोगे 
उतना ज्ञान का अमृत देती है 
यह ज्ञान का भंडार है 
यह लेखों की भरमार है 
इसकी महिमा न्यारी है 
यह पुस्तक जहां से प्यारी है 
यह पुस्तक जहां से प्यारी है |

रविवार, नवंबर 14, 2010

जिज्ञासा

बादलों के बीच घर बनाकर 
इन्द्रधनुष रहता है 
क्या वह भी हाउस टैक्स भरता है 
दुनिया के पर्यटन नक़्शे पर 
क्या चाँद भी अंकित होता है ?
क्योंकि हर इंसान आजकल 
चाँद पर पिकनिक की बात कहता है 
आजकल जब इंसान 
दुसरे ग्रह की यात्रा करता है,
तो क्या वह भी पासपोर्ट,वीज़ा लेता है ?
क्या मशीनी रोबोट भी 
रोता है और खुश होता है ?
जवाब दो इसका 
क्या तुमने इस बारे में सोचा है ?
ये आजकल नन्हे-मुन्ने 
बच्चों की जिज्ञासा है |


शनिवार, नवंबर 13, 2010

सिपाही

हम है सिपाही हम है सिपाही 
देश की रक्षा करने निकले 
आजादी है हमने चाही| 
भारत माँ के रक्षक है  हम 
माँ के बेटे बहनों के भाई 
हम है सिपाही हम है सिपाही| 
देश की रक्षा की खातिर 
सीने पर भी गोली खाई| 
भारत माँ पर आंच न आये 
दुश्मन बच कर भाग न पाए 
ईश्वर इतनी शक्ति देना 
दुश्मन जंग न जीत पाए| 
आजादी के हम है राही
आजादी है हमने चाही 
हम है  सिपाही हम है सिपाही |

गाँधी जी

भारत की आजादी के लिए
गाँधी बापू ने संघर्ष किया
सत्य पर वह अडिग रहे
उन्होंने सत्याग्रह किया |
न्याय के लिए वो सदा लड़े
अहिंसा का मंत्र हमें दिया |
सत्य के वो पुजारी थे 
झूठ का साथ कभी न दिया |
आजादी के लिए लड़े 
गाँधी बापु कहलाये
भारत राष्ट्र के बेटे थे 
राष्ट्रपिता वह कहलाये | 

घडी

जादु की है छड़ी 
समय बतलाती घडी 
टिक टिक टिक टिक करती 
समय की सीढ़ी चढ़ती 
घडी की टिक टिक कहती 
समय बड़ा बलवान 
समय का कहना मानो 
पुरे होंगे हर अरमान 
जादु की है छड़ी 
समय बतलाती घडी |

बुधवार, नवंबर 10, 2010

एकता में शक्ति है

एकता में शक्ति है 
एकता में भक्ति है 
हिन्दुस्तानीयों के दिल में 
एकता धडकती है 
एकता अनेकता 
एकता में नेकता
एकता में है मज़ा 
ये दुश्मनों को दे सजा 
एकता में शक्ति है 
एकता में भक्ति है
हिन्दुस्तानीयों के दिल में 
एकता धडकती है|

चाँद,सितारे,कलम,किताब इनसे मैं करती हूँ बात

चाँद,सितारे,कलम,किताब 
इनसे मैं करती हूँ बात
कितने प्यारे दोस्त है मेरे 
देते है सब मेरा साथ| 
चाँद और सितारों को देखो 
फैलाते है ये प्रकाश
अपनी चमक मुझको देते है
जब भी मैं छूती आकाश
चाँद,सितारे,कलम,किताब
देते है सब मेरा साथ| 
कलम देती है मुझे हौसला
जगाती है यह मुझमे आस 
किताब देती विचारों का बल 
बनती है मेरी आवाज 
चाँद,सितारे,कलम,किताब 
इनसे मैं करती हूँ बात
कितने प्यारे दोस्त है मेरे 
देते है सब मेरा साथ|   

मंगलवार, नवंबर 09, 2010

मंजिल होगी तेर पास

मंजिल दूर नहीं तू मत डर 
जीत तेरी होगी हिम्मत कर
इतिहास इसका गवाह है 
हिम्मत वाला ही जीता है  
झूठ का दूर करदे दलदल 
सच से जीवन करदे उज्वल
जीवन से मत हो तू निराश 
मेहनत से मत हो तू हताश 
जीत होगी तेरे पास 
जीत होगी तेरे साथ
मंजिल होगी तेरे पास|

मंगलवार, नवंबर 02, 2010

शुभ दीपावली

फुलझड़ियाँ नन्हे जला रहे 
चकरी संग चक्कर लगा रहे
वह देखो रस्सी नाच रही
अनार भी झिलमिला रहे|
हम दीपावली मना रहे|

दीपों की जगमग गली-गली
घर-घर में रौनक लगी लगी
पूजा की थाली सजा रहे
हम दीपावली मना रहे|

घर को महका रहे व्यंजन
सजधज कर दमक रहा आँगन
मेहमान भी आ-जा रहे
हम दीपावली मना रहे|

नए कपड़ों मे सजेधजे
बच्चों के देखो मजे-मजे
पटाखे खूब चला रहे
हम दीपावली मना रहे|

फुलझड़ियाँ नन्हे जला रहे 
चकरी संग चक्कर लगा रहे
वह देखो रस्सी नाच रही
अनार भी झिलमिला रहे|
हम दीपावली मना रहे|

गुरुवार, अक्टूबर 28, 2010

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ
इन शब्दों मे है जादु|
'अ' से पुरे करो अरमान
'आ' से छुलो आसमान
'इ' से इज्जत करो सबकी
'ई'से सीखो ईमानदारी
'उ' से करो उन्नति
'ऊ'से तय करो ऊंचाई
ज्ञान छुपा इन अक्षरों मे
सिखाओ, बांटों
पढ़े लिखे और निरक्षरों में|

बुधवार, अक्टूबर 27, 2010

सुबह का राग


सुबह सुबह चिड़ियों ने राग सुनाया
मिटटी की खुशबु ने मन महकाया|
कभी धीमी धीमी सी हवा चली 
कभी हल्की हल्की सी धुप खिली|
चिड़ियों ने राग सुनाया
नई सुबह का नया उजाला आया|
पक्षियों की वाणी ने 
कानों मे मिश्री घोली,
इतने में मेरी मम्मी गुड मोर्निंग बोली|



मंगलवार, अक्टूबर 26, 2010

रोटी


चिकी बोला-मम्मी मम्मी मुझको भूख लगी|
मम्मी बोली-चिकी बेटा खाले तू रोटी|
चिकी बोला- मम्मी मुझको रोटी नहीं भाएगी|
मम्मी बोली-चिकी बेटा ताकत कहाँ से आएगी|


सोमवार, अक्टूबर 25, 2010

computer काव्य

computer है जादूगर
सभी विषय मे master
बड़ी बड़ी गणनाओं को
तुरंत solve कर देता है
पता नहीं ये इतना सब
एक पल मे कैसे कर लेता है
computer मे information का
खजाना बेहिसाब है
computer के पास हर
सवाल का जवाब है
computer का brain तो
मनुष्य से भी तेज है
आजकल के ज़माने में
computer का ही craze है
बच्चें खुश हो जाते देखकर
computer game है
आजकल तो बड़ों का हाल भी
बिल्कुल same है
घर office और दुकान
computer हर जगह आता काम
कंप्यूटर है जादूगर
सभी विषय मे मास्टर|

शुक्रवार, अक्टूबर 22, 2010

बचपन

हँसता मुस्कुराता बचपन
मासूम सा खिलखिलाता बचपन
कच्ची मिटटी के घड़े सा बचपन
जैसे ढालो ढल जाता बचपन|
बचपन जीवन की पहली सीढ़ी
हंसती मुस्कुराती पीढ़ी
मासूम सी बोली बचपन
मन जैसे हो दर्पण
हँसता मुस्कुराता बचपन
मासूम सा खिलखिलाता बचपन

गुरुवार, अक्टूबर 21, 2010

इन छोटे-छोटे हाथों मे

इन छोटे-छोटे हाथों मे
क्या बात छुपी है ? बोलो
यह किस्मत की रेखाए है,
तुम राज तो इनके खोलो|

ये हाथ तो बढ़ते जायेंगे
मंजिल को जल्द ही पाएंगे
ये किस्मत की रेखाओ को
अब उज्वल बनायेंगे|

खुद को मजबूत बनायेंगे
हम मेहनत करते जायेंगे
इन हाथों मे जो बात छुपी
हम सबके सामने लायेंगे|

इन छोटे-छोटे हाथों मे 
क्या बात छुपी है ? बोलो
यह किस्मत की रेखाए है,
तुम राज तो इनके खोलो|

बुधवार, अक्टूबर 20, 2010

माँ

माँ ने दिया है जन्म हमें
माँ ने ही है पाला 
माँ ने दिए संस्कार हमें
माँ ने जीवन में भरा उजाला|
माँ का हम करे गुणगान
माँ ने  दी बच्चों को पहचान|
माँ के जैसा कौनसा रिश्ता जग मे
न तो धरती न तो नभ मे|
माँ का हृदय बहुत विशाल
रखती है बच्चों का ख्याल
माँ का हम करे गुणगान
माँ तो है सबसे महान|

काजू कतली

न अमेरिका न इटली
ये दिल मांगे काजू कतली
चाहे मोटी हो या पतली
इससे ताकत पाती पसली
ये करेगी तेज दिमाग
हर बात का दोगे सही जवाब
इसकी हर बात है निराली
चाहे होली हो या दिवाली
यह चीज है बिल्कुल असली
ये है स्वादिष्ट काजू कतली|

मेरी अभिलाषा


यह मेरी अभिलाषा है
दुनिया मे नाम कमाऊ मै
सूरज की रौशनी के साथ
मंजिल पर बढती जाऊ मै
दुनिया रूपी आसमान के 
तारों मै झिलमिलाऊ मै 
यह मेरी अभिलाषा है
दुनिया मे नाम कमाऊ मै
पीछे न पैर  हटाऊ मै
मंजिल पर बढती जाऊ मै 
यह मेरी अभिलाषा है
दुनिया मे नाम कमाऊ मै

मंगलवार, अक्टूबर 19, 2010

हँसो और हँसाओ

खेलो,कूदो,मौज मनाओ
खुद भी हँसो और सबको हँसाओ|

हँसना ही तो जीवन है
और हँसाना सत्कर्म है

हँसने से तुम होगे स्वस्थ
कहलाओगे बिल्कुल मस्त

ख़ुशी की ये एक प्याली है
हँसना तो बात निराली है|
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धन्यवाद
नेहा मैथ्यूज़