भगवद् गीता यथारुप मेरे जीवन में भगवान का भेजा सबसे अनुपम उपहार है। जब भी मन चिंताओं , भय और परेशानियों से घिरा होता है तब भगवद् गीता ही सही मार्गदर्शन करती है। कहा जाता है कि दुनिया का ऐसा कोई प्रश्न नही जिसका उत्तर भगवद् गीता में न हो। जो गीता पढ़ते है वे इस बात से भली प्रकार सहमत होंगे । यद्यपि भगवान ने यह ज्ञान अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में दिया था लेकिन ये ज्ञान हम सभी के लिए है क्योंकि कही न कही हम सब भी अपने भीतर कोई न कोई युद्ध लड़ रहे है अपने भय से अपनी चिंताओं आदि से।
मन स्वभाव से चंचल और हठी होता है और इधर उधर भागता फिरता है। जब अनगिनत चाहे अनचाहे विचारों की श्रृंखला सारे जगत में भ्रमण कर लेने के बाद अनायास एक सुझाव भगवद् गीता पर आकर टिकती है तो ऐसा प्रतीत होता है की कोई भुला-भटका, थकाहारा व्यक्ति किसी की सहायता से अपने घर लौट आया हो। गीता पढने वालो पर यह एक विशेष कृपा ही है। वह सुझाव भगवान् के द्वारा ही भेजा गया होता है क्योँकि भगवान ही चैत्यगुरु के रूप में ह्रदय के भीतर से हमारा मार्गदर्शन कर रहे होते है। जीवन की परेशानियों से हटकर भगवद् गीता की शरण मेरे लिए वह घर है, जहा शांति मिलती है जहाँ सुकून है। जहाँ मेरे सर पर किसी का हाथ है जो मुझे गाइड कर रहा हो।
वे है हमारे भगवान श्री कृष्ण 🙏 जो हमें अपने शरणागत होकर जीवन जीना सिखाते है। वह हमें समझाते है कि हम शरीर नही आत्मा है और भगवान के शाश्वत अंश है। वे हमें सही गलत का ज्ञान देते है। किसी भी प्रकार की attachment न रखना और अपने स्वधर्म का त्याग न करते हुए भगवान की प्रसन्नता के लिए कर्म करना। अपने मन और बुद्धि को भगवान में लगाना और जीवन के वास्तविक लक्ष्य को हमेशा याद रखना। यह सब भगवद् गीता की सीख है।
मैं कुछ वर्षो से भगवद् गीता यथारूप का अध्ययन कर रही हूँ और मुझ में काफी बदलाव आया है। गीता के अठारह अध्यायों में हमें स्वयं के , ईश्वर के एवं जगत के बारे में गहराई से समझाया गया है। हमारे सभी सवाल प्रमुखतः इन्ही विषयों के अन्तर्गत होते है। जब भी मन उदास या दुखी हो या फिर कोई विशेष सलाह की आवश्यकता हो तो भगवद् गीता के श्लोक याद आने लगते है। यह अनुभव अभिभूत करने वाला है। गीता पढकर मैं फिर से उसी उत्साह के साथ खड़ी हो जाती हूँ अपने जीवन को सकारात्मकता के साथ जीने में और भक्तिमार्ग पर अग्रसर होने में।