सोमवार, अगस्त 31, 2026

ब्रजवासी

 थोड़ी ब्रज रज मुझ में भी है,

मेरे पूर्वज ब्रजवासी थे।

राधे राधे कहते होंगे,

कान्हा के संग रहते होंगे।

कृष्णमयी बन बचपन में,

जमुना तट पर खेले होंगे।

बड़े भाग्य से मिलता है

ब्रज की धरती पर जन्म सुनो।

कितने पुण्य किए होंगे,

तब जाकर धन्य हुए होंगे।

मैं भी वृन्दावन जाऊँगी,

ब्रजरज माथे पे सजाऊँगी।

कान्हा ने चाहा तो में भी

फिर ब्रजवासी बन जाऊँगी |

                                                                                                                 

                                                                              -   नेहा की कलम से…


शुक्रवार, अगस्त 28, 2026

प्यारा सा है बंधन ये

भाई बहन का उत्सव आया,
राखी सजी कलाई पे।
 
बहना ने है स्नेह जताया,
आशीषें पाती भाई से।
 
नोक झोंक और हंसी ठिठोली,
प्यारा सा है बंधन ये।
 
प्रेम बंधा है इस धागे में,
और बहुत परवाह भी है।

भाई बहन का उत्सव आया,
राखी सजी कलाई पे। 

भईया मेरा सदा खुश रहे,
बहना करे दुआएं ये।
 
कितने सुंदर पल होते है,
राखी के इस उत्सव के।                              

अपनेपन का एहसास जहां हो,
और बचपन की यादें।

रक्षाबंधन की बहुत बहुत शुभकामनाए 


" इस ब्लॉग पर पोस्ट की गई सभी रचनाएँ मौलिक है जो की मेरी और मेरे परिवार के सदस्यों द्वारा लिखी गई है " | किताबों व अन्य प्रोडक्ट्स पर दी जानकारी अनुभव आधारित है |
धन्यवाद
नेहा मैथ्यूज़