सोमवार, अगस्त 24, 2026

सत्व की राह

मुश्किल है असंभव ना,

सत्व की राह पर बढना।

योग की सीढी चढते जाना,

अब न कभी नीचे गिरना।


स्मरण रखो भगवान का,

कर्तव्य कर्म करते जाना।

यही कर्म का कौशल है,

ईश्वर से यूं जुड जाना।


मन को शत्रु ना बनने दो,

मन मित्र बने तो क्या कहना।

सब तो सिखा दिया माधव ने,

अब है काहे का डरना।


मुश्किल है असंभव ना,

सत्व की राह पर बढना।

योग की सीढी चढते जाना,

अब तुम न नीचे गिरना।


गुणों में संघर्ष चलता है

सत्व, रजो, तमो कभी।

कृष्ण का हाथ थामो तो,

तर जाओगे माया से भी।


मिलेंगे हमको भी कृष्णा,

उनकी अगर हम माने।

वह जैसा कहते गीता में,

वैसा बनने की हम ठाने।


मुश्किल है असंभव ना,

सत्व की राह पर बढना।

योग की सीढी चढते जाना,

अब तुम न नीचे गिरना।


          - नेहा की कलम से...


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नेहा मैथ्यूज़