जीवन में गुरु का होना बहुत आवश्यक है। वे गुरु ही है जो हमारा पथप्रदर्शन करते है। गुरु की कृपा से हमारी सोचने समझने की क्षमता का विकास होता है। वे हमें विवेक बुद्धि प्रदान करते है। एक प्रामाणिक गुरु हमें जीवन में सदाचरण और अपनी दिनचर्या में नियमों का पालन करने के निर्देश देते है। जिससे की हम बेहतर मनुष्य बन पाए। गुरु के द्वारा प्रदत्त शिक्षाओं से हमारा व्यक्तित्व विकास होता है। गुरु ही हमें सत्य का मार्ग दिखलाते है और ईश्वर से जोड़ते है। गुरु बिन हम ज्ञान प्राप्त करने की आशा नहीं कर सकते। गुरु आज्ञा का पालन हमारा उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करता है।
आषाढ़ मास की पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है। आज ही के दिन महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ। महर्षि वेद व्यास जी वेदों के संकलनकर्ता तथा महाभारत के रचयिता है। भगवद गीता अध्याय १० श्लोक ३७ में भगवान् श्री कृष्ण कहते है मुनीनामप्यहं व्यासः "मैं समस्त मुनियों में व्यास हूँ। "
महर्षि श्री कृष्ण द्वैपायन व्यास जी ने श्रीमद् भागवतम् आदि पुराणों के माध्यम से हमें श्री कृष्ण के युगो युगो में हुए अवतारों की लीलाओं कथाओं से परिचित कराया। व्यास देव जी की कृपा से आज भी भक्तजन इन महानतम शास्त्रों से ज्ञान लाभ कर पा रहे है तथा भगवान से प्रेम करना और उनके शरणागत होकर भक्तिमय जीवन जीना सीख रहे है।
जीवन में कोई भी समस्या या कठिनाई होने पर या किसी अनिर्णय की स्तिथि में हमें गुरु से मार्गदर्शन की प्रार्थना करनी चाहिए वे अवश्य ही सहायता करेंगे।
भगवद् गीता के अध्याय ४ श्लोक ३४ में भगवान गुरु का महत्त्व बताते हुए कहते है -
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः।।
"तुम गुरु के पास जाकर सत्य को जानने का प्रयास करो। उनसे विनीत होकर जिज्ञासा करो और उनकी सेवा करो। स्वरूपसिद्ध व्यक्ति तुम्हे ज्ञान प्रदान कर सकते है, क्योंकि उन्होंने सत्य का दर्शन किया है। "
आज का दिन एक अवसर है अपने गुरु के प्रति आभार व्यक्त करने का।
गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं
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