7/16/2026

आज फिर कुछ चलो सीख लें

 आज फिर कुछ चलो सीख लें  

हार हार कर चलो जीत लें ।

जो ना चाहे कभी सीखना 

क्या नही है उसे चेतना ।

कोशिश तो कर के देखें हम 

कुछ और कदम बढ़कर देखें हम ।

अपनी क्षमताओं को जानें 

हुनरमंद हम भी है माने।

घबराहट को पिछे छोडे,

नऐ जोश से अब हम दौडे ।

कहे खुद से अब बात वही,

उत्साह बढे और कर्म सही।

जिसने जीवन सवांरा नही,

ऐसा डर अब गवांरा नही ।

आज फिर कुछ चलो सीख लें  

हार हार कर चलो जीत लें ।

                                                                                                                                    

                                                                                                                                   - नेहा मैथ्यूस

6/30/2019

काश ये कविता मैंने लिखी होती ...


शरीर तो बंधन है 
कविता तो आत्मा से आती है 
अमर हो जाती है 
ह्रदय से पन्नों तक 
सदियों तक उन्मुक्त 
एक से दूजे तक 
कानों से जुबां तक 
फिर कभी किसी जन्म में 
सुनते है , सोचते है 
काश ये कविता 
 मैंने लिखी होती ...
- नेहा मैथ्यूस 
" इस ब्लॉग पर पोस्ट की गई सभी रचनाएँ मौलिक है जो की मेरी और मेरे परिवार के सदस्यों द्वारा लिखी गई है " | किताबों व अन्य प्रोडक्ट्स पर दी जानकारी अनुभव आधारित है |
धन्यवाद
नेहा मैथ्यूज़