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7/16/2026

आज फिर कुछ चलो सीख लें

 आज फिर कुछ चलो सीख लें  

हार हार कर चलो जीत लें ।

जो ना चाहे कभी सीखना 

क्या नही है उसे चेतना ।

कोशिश तो कर के देखें हम 

कुछ और कदम बढ़कर देखें हम ।

अपनी क्षमताओं को जानें 

हुनरमंद हम भी है माने।

घबराहट को पिछे छोडे,

नऐ जोश से अब हम दौडे ।

कहे खुद से अब बात वही,

उत्साह बढे और कर्म सही।

जिसने जीवन सवांरा नही,

ऐसा डर अब गवांरा नही ।

आज फिर कुछ चलो सीख लें  

हार हार कर चलो जीत लें ।

                                                                                                                                    

                                                                                                                                   - नेहा मैथ्यूस

1/19/2018

वो जैसा चाहता है


 सूरज से जैसे नही किरणें जुदा 
मैं जिसकी रौशनी तले 
वो है मेरा खुदा 

हरदम साथ है मेरे 
मैं उसके साथ हूँ 
हरदम बंदगी करता 
मैं उसकी बात हूँ |

बड़ी ये बात है 
ऐसा फिर कैसे कहूँ ?
वो जैसा चाहता है 
वैसा ही बनकर रहूँ |

सभी की प्रेरणा बनना 
नहीं आसन है ,
उस की राह पर चलना 
निरंतर ध्यान है |

हो ना पाए कोई भी 
मुझसे खता ,
वो सुधार कर भी दे 
मेरी गलती बता |

मैं उसको मानता दिल से 
वो है मेरा खुदा |

सूरज से जैसे नही किरणें जुदा 
मैं जिसकी रौशनी तले 
वो है मेरा खुदा

हरदम साथ है मेरे 
मैं उसके साथ हूँ 
हरदम बंदगी करता 
मैं उसकी बात हूँ |

- नेहा मैथ्यूस 


2/17/2016

दोहे 3

निखर निखर है निखरता, बेहद इसका दाम।
हीरा यूं ही ना बना, करता है अभिमान।।

सागर जितना गहन है, सरल ना अनुमान।
मनुज की छिपी क्षमता, रत्नों की ज्यों खान।।

आंगन के बीच चमकें, रोशन हो घर द्वार।
दीप फैलाय रोशनी, सबको दे उपहार।।

12/29/2015

दोहे 2

अपने मन की सब कहे, दुजे का ना ध्यान ।
अपने माथे जब पड़ी, तब मिल पाया ज्ञान ।।


आंगन में धूप उतरे, नया सवेरा लाय।
कर्मरत जो रहे सदा, वो ही अवसर पाय।।


सबको जिसकी खोज है, कहते जिसको ज्ञान।
योग्यता से ही मिलता, पाना ना आसान ।।

                              लेखक - नेहा मैथ्यूज

3/10/2015

हाइकु ४

१  नील गगन
    सतरँगी चुनर
    हर्षाए मेघा ।

२   बादल राग
     फिर लेकर आई
     बरखा रानी ।

३   मोर मोरनी
     हरियाली का गीत
     शुभ आशीष ।

४   अरसे बाद
     बरसात का गीत
     फिर सुना है ।

                                                                       लेखक - नेहा मैथ्यूज़ 

3/03/2015

हाइकु ३


नीला आकाश
कोरा लग रहा है 
चलो रंग दे। 

२ 
रंगो में छिपा 
कहां है मेरा लाल 
होली में हाल। 

३ 
उड़े गुलाल 
आई फागुन बेला 
मचे धमाल। 

४ 
रंगों की थाल 
सुशोभित आँगन 
उत्सव आया।

                                                                      लेखक - नेहा मैथ्यूज़

2/24/2015

दोहे १

1
 भारत माँ के सब बच्चे,यूँ लगते है संग 
साथ मिलकर ज्यों सजते,रंगोली के रंग।

2
अपनी छोड़ी राह पे,पथिक को था गुमान
पिछे मुड़कर देख रहा,ना चाहे सामान।


खुद को गर है जानना,साधो थोड़ा मौन 
अंतर की आवाज से,जानो तुम हो कौन।

2/10/2015

क्या कठिन है ?

समय चलता है दोस्तों 
अपनी ही लय में 
तुम भी सुर मिला लो 
ना रहो चिन्ता या भय में 
फिर से लौटना 
बनकर विजेता 
क्या कठिन है ?
ईश्वर के लिखे में 
क्या नहीं रात दिन है ?
पंछी की मिसाल 
ये कवि जो 
दे रहा है 
उसका कहा 
तुमसे भी 
कुछ ना कुछ जुड़ा है 
उसको उड़ान 
फिर से देखो 
मिल गई है 
मंजिल सामने ही थी 
मगर लगती नई है 
क्या ये पहले तय था 
या अब हुआ है 
ईश्वर के लिखे का 
जान लो 
अपना मजा है। 
घर को लौटना 
कितना सुखद 
कितना भला है 
खोई राह 
फिर से खोजना 
फिर क्यों खला है। 
जादु सा ये कैसा 
आज कोई चला है 
इसके सार में देखो 
मुझको क्या मिला है ,
रुक रुक कर 
जो चल रही थी 
दौड़ती है 
मुश्किल रास्तों को 
अब नही वो 
छोड़ती है 
अनुभव से समझ आएगी 
ये जो जिन्दगी है 
ईश्वर के लिखे को 
मानना ही बन्दगी है। 



2/03/2015

एक गुलाब फिर खिला है


एक गुलाब फिर खिला है 
तोड़े गए फूलों के बीच 
उसको कुछ समय मिला है 
पौधा प्यार से रहा है सींच 

कलियाँ शायद सोच रही है 
हमको भी कुछ समय मिलेगा 
फूल को जैसा देख रही है 
धूप छाँव भर पेट मिलेगा 

या फिर लिया जाएगा तोड़ ?
नहीं ! हम भी लहलहाएँगी 
अपनी बगियाँ को छोड़ 
यूँ ही न चली जाएँगी, महकाएँगी 

रंगो से सजाएँगी , स्वप्न के यह थे, पल बस चंद 
आह!  फिर हुआ वही जिसका डर था, महक रह गयी मंद





                                                                                                            

1/20/2015

जीवन जी तो लें

नम आँखें है
दिल यादों में अब यूँ खो रहा है 
कहीं बादल बरस 
खुद में ही जो गुम हो रहा है 

गम से जो निकल 
खुशियों के आँसु रो रहा है 
नए सपने जमीं पर 
जैसे कोई बो रहा है 

उड़ने को 
तैयार पर होने लगे है 
अपनी हर हिचक को 
जैसे अब खोने लगे है 

सपनो का महल 
जमीं पर बनने लगा है 
जीवन जी तो ले 
अब मन यही करने लगा है 

आओ बढ़ चलें 
गिर भी पड़े तो डर नहीं है 
फिर से थाम ले आ कर 
वो ईश्वर भी यहीं है। 


                                                                                                          

9/18/2012

हर कोई खुद में खास है

तेरी हथेली पर सबकुछ 
मेरी मुट्ठी में आस है
ईश्वर ने तुझको भी दी
मुझको भी दी श्वास है
हर कोई खुद में खास है।

मै भी सफल बनूँ  इक दिन
बस अवसर की तलाश है
तुझ सी बात है मुझ में भी
ऐसा मेरा विश्वास है
  हर कोई खुद में खास है।

सबके लिए है धरती
सबके लिए आकाश है
मंजिल ढूंढ़ ने वालों को
ढूंढ़ लेता प्रकाश है
हर कोई खुद में खास है।



                                                                                           

9/04/2012

जब सपना कोई पूरा हो

जब सपना कोई पूरा हो  
ख़ुशी न हो सकती बयान 
धड़कन ही सब कहती है 
सुनते जमीन और आसमान।

किस्मत यूं दिखने लगती
पुरे होते जब अरमान   
जैसे ईश्वर खुद आए 
जीवन में बनकर मेहमान।

हाथ बढाए खडी हुई
 लेती राहें अब मेरा नाम 
जो राहें बनती थी 
इस से पहले मुझसे अन्जान।

जब सपना कोई पूरा हो
ख़ुशी न हो सकती बयान 
धड़कन ही सब कहती है 
सुनते जमीन और आसमान।



7/20/2012

पृथ्वी पर बढ़ रही तपन

पृथ्वी पर बढ़ रही तपन,
पिघल रहे हिमपर्वत हर क्षण
कटते जा रहे सारे वन
मुश्किल आ पड़ी भीषण
पृथ्वी पर बढ़ रही तपन,
पिघल रहे हिमपर्वत हर क्षण
क्रंदन कर रहा कण-कण
खतरे मैं है पर्यावरण
फिर क्यूँ नहीं पिघलता मानव मन?
क्यूँ नहीं पिघलता मानव मन?


7/19/2012

थैंक यू God!

अच्छे और बुरे में 
फर्क बताया थैंक यू 
इसीलिए ये सारा 
खेल रचाया, थैंक यू 
पहले पहल लगा,  
क्या लोग ऐसे भी होते है ?
वो बोले तो जाना कि 
तेरा मैसेज क्या है, थैंक यू 
जीवन का एक और 
पाठ पढाया,थैंक यू 
एक बार फिर मेरा 
साथ निभाया,थैंक यू !
थैंक यू !

6/26/2012

समय और मनुष्य

(1)
कल के भरोसे -
वक्त हाथ से 
फिसलता रहा ,
टलता रहा,
खलता रहा,
और यह सब यूँही 
चलता रहा।

(2)
सोचता हूँ घडी 
बदल डालूं ,
कुछ है 
जो रोकता है,
उसकी धुल हटा लूँ 
फिर देखू वक्त क्या है।

(3)
दिन मुश्किल है मगर 
शाम आज भी होगी,
मुश्किलों पे जीत पाकर 
हैरान वो आज भी होगी।

(4)
वह तब भी टिक टिक करती थी,
वह अब भी टिक टिक करती है,
अब उसकी यह टिक टिक 
जाने क्यूँ अच्छी लगती है,
शायद मेरे सोचने का 
नजरिया बदल गया,
समय तुम्हारी ताकत 
मैं भी संभल गया।



8/22/2011

कान्हा कान्हा कहे मेरा मन


भक्त- 
कान्हा कान्हा कहे मेरा मन, कान्हा जाने कहाँ छुपा 
मुरली की आवाज़ सुना दे, इतनी तो कर दे कृपा |

कान्हा-
कान्हा कहे मैं तेरे ह्रदय में, रहता हूँ , रहूँगा सदा 
तू मुझको कहाँ पर ढूंढे , तेरे पास ही तो है पता|


भक्त-
कभी गुरु में , कभी पिता में मैंने तुझको देखा है
कभी भाई में , कभी सखा में भेस बदलकर बैठा है|

कान्हा-
कभी गुरु , कभी पिता , कभी भाई और कभी सखा
इन सब अवतारों में, मैं तो तेरे लिए ही बना - मिटा|

भक्त-
मिल गया अब मुझको कान्हा , नहीं, वह तो साथ ही था 
जब जब आशीर्वाद मिला था , सर पर उसका हाथ ही था|

कान्हा-
सच्चे भक्त का हाथ थामकर , मैं राह दिखलाता हूँ
धर्मं हो या कर्मभूमि हो , साथ हूँ , सारथी कहलाता हूँ|

4/12/2011

सम्पूर्ण सृष्टि करें नमन

सम्पूर्ण सृष्टि करें नमन 
कितना स्नेहिल तेरा मन 
तुने दिया है यह जीवन
तुझको करती हूँ अर्पण |

नन्ही सी किलकारी से 
तु कितनी खुश हो जाती थी
ऐ माँ तेरी हर लोरी 
मन में मिठास दे जाती थी |

नन्हे नन्हे क़दमों को 
जब तु चलना सिखलाती थी 
ऐ माँ तेरे क़दमों से 
मैं अपने कदम बढाती थी |

तेरे हाथों से खाया जो 
प्यार भरा हर एक कौर 
पेट भर भी जाये तो 
जी कहता है माँ और और  |

तेरी ममता की मुस्कान 
मेरे दिल को छु जाती है 
ऐ माँ तेरी हर एक सीख 
अमिट छाप दे जाती है |

घनी धुप में छाँव वृक्ष की 
सुख का आभास कराती है 
ऐ माँ तेरी ममता भी 
कुछ ऐसा अहसास कराती है |

सम्पूर्ण सृष्टि करें नमन 
कितना स्नेहिल तेरा मन 
तुने दिया है यह जीवन
तुझको करती हूँ अर्पण |



11/28/2010

चिड़िया

दाना चुगती एक चिड़िया दूजी से बोली
सबको अच्छी लगती है हमारी बोली
सुबह-सुबह जब मिलकर चहचहाती है हम
लोग भूल जाते है अपने सारे गम
बच्चों के संग मिलकर माँ डाले दाना
सैर करते निहारे हमको नानी-नाना
इसी तरह सदा हम खुशियाँ फैलाए
आओ मिलकर फिर से हम चहचहाए |


11/18/2010

हाइकु २

१. घर

पंछी लौटते 
घौंसले में है बच्चे 
घर आ गया |


२. सावन 

ऋतु सावन 
नभ में फैले रंग 
मनभावन | 

11/15/2010

पुस्तक की महिमा


पुस्तक की महिमा न्यारी 
पुस्तक है जहां से प्यारी 
ये सबको अच्छी लगती
ये सबको शिक्षा देती 
हिंदी में संस्कारों का 
अच्छी-अच्छी कहानी का 
गणित में हिसाब का 
सामाजिक में समाज का 
देश के इतिहास का 
संस्कृति का सभ्यता का 
गीता का कुरान का 
पुजा का अजान का 
ज्ञान हमको देती है 
जितना इसको पढोगे 
उतना ज्ञान का अमृत देती है 
यह ज्ञान का भंडार है 
यह लेखों की भरमार है 
इसकी महिमा न्यारी है 
यह पुस्तक जहां से प्यारी है 
यह पुस्तक जहां से प्यारी है |