मंगलवार, नवंबर 23, 2010

सी.बी.मैथ्यूस 'आगा' की शायरी -8

यह शायरी मेरे दादाजी स्व.सी.बी.मैथ्यूस 'आगा' द्वारा लिखित है | उनका जन्म सन १९१९ में हुआ था तथा उनकी मृत्यु २००९ में हुई| उन्होंने अपने जीवन में कई उम्दा शायरी लिखी|अपने जीवन के अंतिम वर्षो में वह अपनी कुछ शायरी हमें लिखवाया करते थे  उनमे से कुछ ही आज मेरे पास मौजूद है| जो में आपके सामने प्रस्तुत कर रही हूँ 

हो कौन मुकाबिल 
तेरे ये किसकी ताब है 
तू माहे शब है तू सुबहे आफताब है 
हुस्न-ए-अजल है तू 
तेरा कामिल शबाब है 
कोई जवाब नही तू लाजवाब है |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

" इस ब्लॉग पर पोस्ट की गई सभी रचनाएँ मौलिक है जो की मेरी और मेरे परिवार के सदस्यों द्वारा लिखी गई है " | किताबों व अन्य प्रोडक्ट्स पर दी जानकारी अनुभव आधारित है |
धन्यवाद
नेहा मैथ्यूज़