कार्यक्रमों के बीच
अचानक से टपकते है|
अख़बारों में भी
धड़ल्ले से छपते है|
सड़कों,खम्बों,दीवारों पर
च्विंगम से चिपकते है|
हर जगह दिख जाते
ये अनचाहे वक्ता है
विज्ञापनों से डर लगता है|
कही पान की पीकों से लदे
कही फटें, उखड़े
प्रकृति को छुपाते
विशाल होर्डिंग्स में लगे|
अब तो उत्तर भी दक्षिण को
देखने को तरसता है
विज्ञापनों से डर लगता है|
नेट पर हार गया लगता है
पॉप अप ब्लोकर
सब के सामने बन जाता है
कैसे जोकर
पॉप अप को क्लोस कर करके
हम थकता है
विज्ञापनों से डर लगता है|
बच्चों से लेकर बड़ों ने
रट डाले है
विज्ञापनों ने ऐसे बुने जाले है
अच्छा बुरा सभी
यह बकता है
विज्ञापनों से डर लगता है|
इस छोटी सी दुनिया में आपको मिलेंगी मेरी रचनाएं और कुछ अपनों के दिल से निकली बातें, यादें जिन्हें संजो कर रखना अच्छा लगता है.....
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" इस ब्लॉग पर पोस्ट की गई सभी रचनाएँ मौलिक है जो की मेरी और मेरे परिवार के सदस्यों द्वारा लिखी गई है " | किताबों व अन्य प्रोडक्ट्स पर दी जानकारी अनुभव आधारित है |
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good!!
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