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3/10/2015

हाइकु ४

१  नील गगन
    सतरँगी चुनर
    हर्षाए मेघा ।

२   बादल राग
     फिर लेकर आई
     बरखा रानी ।

३   मोर मोरनी
     हरियाली का गीत
     शुभ आशीष ।

४   अरसे बाद
     बरसात का गीत
     फिर सुना है ।

                                                                       लेखक - नेहा मैथ्यूज़ 

3/03/2015

हाइकु ३

नीला आकाश
कोरा लग रहा है 
चलो रंग दे। 

२ 
रंगो में छिपा 
कहां है मेरा लाल 
होली में हाल। 

३ 
उड़े गुलाल 
आई फागुन बेला 
मचे धमाल। 

४ 
रंगों की थाल 
सुशोभित आँगन 
उत्सव आया।

                                                                      लेखक - नेहा मैथ्यूज़

11/18/2010

हाइकु २

१. घर

पंछी लौटते 
घौंसले में है बच्चे 
घर आ गया |


२. सावन 

ऋतु सावन 
नभ में फैले रंग 
मनभावन | 

11/05/2010

मैंने भी लिखे हाइकु १

आज नेट सर्फिंग के दौरान एक ब्लॉग द्वारा हाइकु से मेरा परिचय हुआ|कविता के इस जापानी रूप को देखकर, मुझे भी लगा की मैं हाइकु लिखूं|पर दिखने में चंद यह पंक्तिया लिखना बिल्कुल भी आसन काम नहीं है|फिर भी कोशिश करने मे क्या हर्ज है|५+७+५ अक्षरों के संयोजन से बनने वाले हाइकु पेश कर रही हूँ|

१.   पंछी चहके
     चहकता चमन
     चहके हम |

२.  सर उठाके
     चल रहे थे हम
     लो गिर पडे|

अभी के लिए इतना ही| कहा न यह  लिखना बिल्कुल भी आसन काम नहीं है| क्या में हाइकु सही तरह लिख पाई|जरुर बताये|